Shraman Varsh 01 Ank – 05, March 1950

यह पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी की शोध पत्रिकाओं का पहला संस्करण है।

श्री पार्श्वनाथ विद्याश्रम, बनारस का मुखपत्र

संपादक – इंद्रचंद्र शास्त्री
दल सुख मालवणिया
पृथ्वीराज जैन
मोहन लाल मेहता
प्रकाशक –
कृष्णचंद्राचार्य
अधिष्ठाता, श्री पार्श्वनाथ विद्यापीठ (विद्याश्रम)
हिन्दू युनिवर्सिटी, बनारस, यूपी, 221005.

This is a first edition of Research Journals of Parshwanath Vidyapeeth , Varanasi.

Mouthpiece of Shri Parshwanath Vidyashram, Banaras

Editor – Indrachandra Shastri
Dal Sukh Malvaniya
Prithviraj Jain
Mohan Lal Mehta
Publisher –
Krishnachandracharya
Dean, Shri Parshvanath Vidyapeeth (Vidyaashram)
Hindu University, Banaras, UP, 221005

इस अंक में 

  1. स्वयं मंजिल पास आई (कविता) – श्री ज्ञानचंद्र भारिल्ल
  2. अपनी बात (संपादकीय) – इंद्र, एम. ए.
  3. श्रमण संस्कृति और नया संविधान – श्री पृथ्वीराज जैन
  4. पयान की वेला (गद्य कविता) – रवींद्र
  5. दक्षिण हिन्दुस्तान और जैन धर्म – प्रो. दलसुख मालवणिया
  6. बलिवेदी पर – श्री ज्ञानचंद्र भारिल्ल
  7. स्नेह बंधन (कहानी)- मोहन लाल मेहता
  8. हमारा आज का जीवन – श्री रतन सागर जैन
  9. छाया पर अधिकार – ईसपबोध
  10. साहित्य सत्कार (समालोचना) – प्रो. दलसुख मालवणिया मोहनलाल मेहता
  11. भारतीय जनतंत्र की पहली महावीर जयंती – इंद्र, एम. ए.
  12. एक नई योजना – इंद्र चंद्र शास्त्री
  13. भारत जैन महामंडल – मद्रास अधिवेशन के प्रस्ताव

In this issue –

  1. My destination came near (Poem) – Shri Gyanchandra Bharilla
  2. Your Opinion (Editorial) – Indra M. A.
  3. Shraman Culture and New Constitution – Shri Prithviraj Jain
  4. Payan Ki Vela (Prose Poem) – Ravindra
  5. South Hindustan and Jainism – Prof. Dalsukh Malvania
  6. On the altar – Shri Gyanchandra Bharil
  7. Sneh Bandhan (Story)- Mohan Lal Mehta
  8. Our Today’s Life – Shri Ratan Sagar Jain
  9. Master the Shadow – Aesopbodh
  10. Literary Award (Criticism) – Prof. Dalsukh Malvaniya, Mohanlal Mehta
  11. First Mahavir Jayanti of Indian Democracy – Indra M. A.
  12. A New Plan – Indra Chandra Shastri
  13. Bharat Jain Mahamandal – Madras Conference Proposals