Shraman Varsh 02 Ank – 01 November 1950

यह पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी की शोध पत्रिकाओं का द्वितीय संस्करण है।

श्री पार्श्वनाथ विद्याश्रम, बनारस का मुखपत्र

संपादक – इंद्रचंद्र शास्त्री
दल सुख मालवणिया
पृथ्वीराज जैन
मोहन लाल मेहता
प्रकाशक –
कृष्णचंद्राचार्य
अधिष्ठाता, श्री पार्श्वनाथ विद्यापीठ (विद्याश्रम)
हिन्दू युनिवर्सिटी, बनारस, यूपी, 221005.

This is a Second edition of Research Journals of Parshwanath Vidyapeeth , Varanasi.

Mouthpiece of Shri Parshwanath Vidyashram, Banaras

Editor – Indrachandra Shastri
Dal Sukh Malvaniya
Prithviraj Jain
Mohan Lal Mehta
Publisher –
Krishnachandracharya
Dean, Shri Parshvanath Vidyapeeth (Vidyaashram)
Hindu University, Banaras, UP, 221005.

इस अंक में 

  1. नव वर्ष – श्री ज्ञानचन्द्र भारिल्ल
  2. जीवन गति मंथर क्यों हो – डॉ. चन्द्रधर शर्मा
  3. अपनी बात – संपादकीय
  4. ‘न्याय संपन्न विभव’ – प्रो दलसुख मालवणिया
  5. मैं – श्री देवनाथ पाण्डेय ‘रसाल’
  6. काम होकर ही रहेगा – रवीन्द्र
  7. श्रमण संस्कृति का केंद्र – विपुलाचल और उसका पड़ोस – श्री गुलाब चंद्र चौधरी
  8. प्रायश्चित (कहानी) – श्री इंद्र
  9. चित्र परिचय – श्री इंद्र
  10. श्री तारण स्वामी – श्री देवेन्द्र कुमार
  11. इंसानियत के उत्तरदायित्वपूर्ण वसूल – श्री जेठमल बोथरा
  12. साहित्य सत्कार –
  13. आचार्य कालक और ‘हंस मयूर’ – पृथ्वीराज जैन
  14. विद्याश्रम समाचार –

In this issue –

  1. New Year – Shri Gyanchandra Bharil
  2. Why should the pace of life slow down – Dr. Chandradhar Sharma
  3. Your point – Editorial
  4. ‘Nyay Sampann Vibhaav’ – Prof. Dalsukh Malvaniya
  5. I – Shri Devnath Pandey ‘Rasal’
  6. The work will get done – Ravindra
  7. Center of Shramana culture – Vipulachala and its neighborhood – Shri Gulab Chandra Choudhary
  8. Atonement (Story) – Shri Indra
  9. Picture introduction – Shri Indra
  10. Mr. Taran Swami – Mr. Devendra Kumar
  11. Responsible citizens of humanity – Shri Jethmal Bothra
  12. Literary hospitality –
  13. Acharya Kalak and ‘Hans Mayur’ – Prithviraj Jain
  14. Vidyashram News –