Shraman Varsh 01 Ank – 03 January 1950

यह पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी की शोध पत्रिकाओं का पहला संस्करण है।

श्री पार्श्वनाथ विद्याश्रम, बनारस का मुखपत्र

संपादक – इंद्रचंद्र शास्त्री
दल सुख मालवणिया
पृथ्वीराज जैन
मोहन लाल मेहता
प्रकाशक –
कृष्णचंद्राचार्य
अधिष्ठाता, श्री पार्श्वनाथ विद्यापीठ (विद्याश्रम)
हिन्दू युनिवर्सिटी, बनारस, यूपी, 221005.

This is a first edition of Research Journals of Parshwanath Vidyapeeth , Varanasi.

Mouthpiece of Shri Parshwanath Vidyashram, Banaras

Editor – Indrachandra Shastri
Dal Sukh Malvaniya
Prithviraj Jain
Mohan Lal Mehta
Publisher –
Krishnachandracharya
Dean, Shri Parshvanath Vidyapeeth (Vidyaashram)

इस अंक में 

  1. मृत्युंजय – इंद्र एम. ए.
  2. अपनी बात – इंद्र एम. ए.
  3. धर्म का पुनरुद्धार और संस्कृति का नवनिर्माण – प्रो. दलसुख मालवणिया
  4. नाटक की परीक्षा – इंद्र एम. ए.
  5. प्रेम का अभ्यास – आचार्य विनोबा
  6. हार जीत – ज्ञानचंद भारिल्ल
  7. मानव जीवन का आधार – श्री पृथ्वीराज जैन
  8. सम्यक्त्व की कसौटी – मोहनलाल मेहता, सिध्दांत प्रभाकर
  9. अधूरा स्वप्न – श्री ब्रह्मदेव
  10. प्राचीन भारत में संस्कृतियों का संघर्ष – आचार्य चंद्रशेखर शास्त्री
  11. सेवा का अर्थ – मुनि श्री विद्या विजय जी
  12. बापू मानते थे –

 In this issue

  1. Mrityunjay – Indra M. A.
  2. Your point – Indra M. A.
  3. Revival of religion and renewal of culture – Prof. Dalsukh Malvania
  4. Drama Exam – Indra M. A.
  5. Practice of Love – Acharya Vinoba
  6. Harjeet – Gyanchand Bharil
  7. Basis of human life – Shri Prithviraj Jain
  8. Criterion of Equality – Mohanlal Mehta,Siddhant Prabhakar
  9. Incomplete dream – Shri Brahmadev
  10. Clash of Cultures in Ancient India – Acharya Chandrashekhar Shastri
  11. Meaning of service – Muni Shri Vidya Vijay Ji
  12. Bapu believed –

Shraman Varsh 01 Ank – 02, December 1949

यह पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी की शोध पत्रिकाओं का पहला संस्करण है।

श्री पार्श्वनाथ विद्याश्रम, बनारस का मुखपत्र

संपादक – इंद्रचंद्र शास्त्री
दल सुख मालवणिया
पृथ्वीराज जैन
मोहन लाल मेहता
प्रकाशक –
कृष्णचंद्राचार्य
अधिष्ठाता, श्री पार्श्वनाथ विद्यापीठ (विद्याश्रम)
हिन्दू युनिवर्सिटी, बनारस, यूपी, 221005.

This is a first edition of Research Journals of Parshwanath Vidyapeeth , Varanasi.

Mouthpiece of Shri Parshwanath Vidyashram, Banaras

Editor – Indrachandra Shastri
Dal Sukh Malvaniya
Prithviraj Jain
Mohan Lal Mehta
Publisher –
Krishnachandracharya
Dean, Shri Parshvanath Vidyapeeth (Vidyaashram)
Hindu University, Banaras, UP, 221005.

इस अंक में (In this issue)


1. महा श्रमण (कविता) – इंद्र एम ए (Maha Shramana (Poem) – Indra M. A.)
2. अपनी बात ( संपादकीय) – इंद्र एम ए (Apni Baat (Editorial) – Indra M. A.)
3. युध्द और श्रमण – पं. कैलाश चंद्र शास्त्री (War and Shraman – Pt. Kailash Chandra Shastri)
4. श्रमण रीति – श्री जयभगवान जैन (Shraman Riti – Shri Jai Bhagwan Jain)
5. आह्वान ! – रवींद्र (Call! – Ravindra)
6. शास्त्र और शस्त्र – पं सुखलाल जी (Shastra and weapons – Pandit Sukhlal ji)
7. जीवन के चार रुप – मुनि श्री अमरचंद जी (Four forms of life – Muni Shri Amarchand Ji)
8. मंजिल दूर है – श्री ज्ञानचंद भारिल्ल (The destination is far away – Shri Gyanchand Bharill)
9. संत- समागम (कहानी) – इंद्र एम ए (Sant- Samagam (story) – Indra M. A.)
10. अहिंसा और शस्त्र बल – आचार्य विनोबा भावे ( Non-violence and force of arms – Acharya Vinoba Bhave)
11. सांप्रदायिक कदाग्रह – पृथ्वीराज जैन एम. ए. शास्त्री (communal hatred

– Prithviraj Jain M. A. Shastri)
12. तर्क और भावना – काका कालेलकर (Reason and Emotion – Kaka Kalelkar)
13.अहिंसा का व्यापक अर्थ – लालजीराम शुक्ल ( Broad meaning of non-violence – Laljiram Shukla)
14. विचारों की लेन देन – साम्यवाद और श्रमण विचार धारा जैन धर्म और जातिवाद (Exchange of ideas – Communism and Shraman school of thought, Jainism and casteism.)

Shraman Varsh 01 Ank-01, November (1949)

यह पार्श्वनाथ विद्यापीठ, वाराणसी की शोध पत्रिकाओं का पहला संस्करण है।

श्री पार्श्वनाथ विद्याश्रम, बनारस का मुखपत्र

संपादक – इंद्रचंद्र शास्त्री
दल सुख मालवणिया
पृथ्वीराज जैन
मोहन लाल मेहता
प्रकाशक –
कृष्णचंद्राचार्य
अधिष्ठाता, श्री पार्श्वनाथ विद्यापीठ (विद्याश्रम)
हिन्दू युनिवर्सिटी, बनारस, यूपी, 221005.

This is a first edition of Research Journals of Parshwanath Vidyapeeth , Varanasi.

Mouthpiece of Shri Parshwanath Vidyashram, Banaras

Editor – Indrachandra Shastri
Dal Sukh Malvaniya
Prithviraj Jain
Mohan Lal Mehta
Publisher –
Krishnachandracharya
Dean, Shri Parshvanath Vidyapeeth (Vidyaashram)
Hindu University, Banaras, UP, 221005.

इस अंक में 

  1. श्रमण संस्कृति का अमर देवता – मुनि अमर चंद्र शास्त्री
  2. जीवन मंत्र – श्री रविन्द्र नाथ ठाकुर
  3. अपनी बात – (संपादकीय) इंद्र एम ए
  4. श्रमण के प्रति – मोहनलाल मेहता सि. प्रभाकर
  5. लोक कल्याण के लिए श्रमण संस्कृति – भिक्षु जगदीश कश्यप
  6. साम्यवाद और श्रमण विचार धारा- पृथ्वी राज जैन
  7. सबसे पहला पाठ- श्री कृष्ण चंद्राचार्य
  8. किसकी पूजा – श्री ज्ञानचंद भारिल्ल
  9. पार्श्वनाथ विद्याश्रम – एक सांस्कृतिक अनुष्ठान – प्रो. दलसुख मालवणिया
  10. मूर्ख राज – तुर्गनेव
  11. मगध में दीप मालिका- मुनि श्री कान्ति सागर जी

In this issue

  1. Immortal God of Shramana Culture – Muni Amar Chandra Shastri
  2. Life Mantra – Shri Rabindranath Tagore
  3. Your Opinion – (Editorial) Indra M. A.
  4. Towards Shraman – Mohanlal Mehta Sir. Prabhakar
  5. Shramana Culture for Public Welfare – Monk Jagdish Kashyap
  6. Communism and Shraman ideology- Prithvi Raj Jain
  7. First lesson- Shri Krishna Chandracharya
  8. Whom worshiped – Shri Gyanchand Bharil
  9. Parshwanath Vidyashram – A Cultural Ritual- Prof. Dalsukh Malvaniya
  10. Foolish Secrets – Turganev
  11. Deep Malika in Magadha – Muni Shri Kanti Sagar Ji

Shraman Varsh 07 Ank 1-12 (1955-56)

Shraman Varsh 02 Ank 01- 12 (1950-51)

This is second volume