आदरणीय सर प्रणाम, सर्वप्रथम मैं पवित्र पावन बनारस की धरती को प्रणाम करते हुए इस संदर्भ में यह कहना चाहता हूँ –
“पत्थर में पारस की ,पक्षी में सारस की , तिथि में ग्यारस की, बात ही कुछ और है
दुनिया में भारत की, भारत में यूपी की
यूपी में बनारस की, बात ही कुछ और है….बात ही कुछ और है
वास्तव में सर मैं धन्य हो गया पार्श्वनाथ विद्यापीठ बनारस द्वारा आयोजित इस अद्भुत National seminar में आकर जहाँ मुझे ज्ञान के साथ साथ प्रेम, स्नेह और सम्मान की त्रिवेणी में गोता लगाने का अवसर मिला। मैं आभारी हूँ हमारे अभिभावक प्रोफेसर डॉ. रमानाथ पाण्डेय सर का जिन्होंने सभी के साथ आत्मीय भाव रखा और जैन दर्शन के अलौकिक ज्ञान से हमें प्रेरित किया। साथ ही साथ मैं डॉ. प्रवीण सर के प्रति भी विशेष श्रद्धा रखता हूँ जिन्होंने कम उम्र में ही इतने विशेष अनुभव को प्राप्त कर लिया है उनका मुझ पर प्रारंभ से ही स्नेह रहा मंच संचालन हेतु अनिता यादव एवं मधु जी ने भी अपनी प्रतिभा कौशल का परिचय दिया। आपने सेमिनार में भारत के बड़े बड़े विद्वानों को बुलाकर इसकी प्रतिभा में चार चाँद लगा दिया।
आपका ही
डॉ. श्रवण कुमार मोदी

